मामला लोअर कोर्ट में वापस
कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के कैमक स्ट्रीट स्थित पार्टी कार्यालय को खाली कराने के नोटिस से जुड़े मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले को सिटी सिविल कोर्ट में वापस भेजते हुए वहां विस्तृत सुनवाई के बाद फैसला लेने को कहा है।
जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस संदीप कुमार डे की डिवीजन बेंच ने कहा कि मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनकर निचली अदालत को निर्णय लेना चाहिए। कोर्ट ने मामले के जल्द निपटारे के लिए समयसीमा भी तय की है।
हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि पूजा की छुट्टियों के बाद अदालत में नियमित कामकाज शुरू होने के 15 दिनों के भीतर संपत्ति से जुड़े ‘स्टेटस को’ (यथास्थिति) के मुद्दे पर फैसला किया जाए। कोर्ट ने कहा कि सुनवाई इस तरह पूरी की जाए कि किसी भी पक्ष के हित पर प्रतिकूल असर न पड़े।
इससे पहले सिटी सिविल कोर्ट ने मुख्य मुकदमे का फैसला आने तक संबंधित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। मकान की मालकिन ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
9 कैमक स्ट्रीट की सातवीं-आठवीं मंजिल पर है कार्यालय
अभिषेक बनर्जी का पार्टी कार्यालय 9 कैमक स्ट्रीट की सातवीं और आठवीं मंजिल पर स्थित है। 27 अगस्त को वहां से बिलबोर्ड हटाने की कार्रवाई के दौरान नगर निगम अधिकारियों और कथित तौर पर अभिषेक समर्थकों के बीच विवाद हुआ था। इस दौरान पुलिस के साथ भी धक्का-मुक्की की बात सामने आई थी।
इसके बाद इमारत की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विवाद और बढ़ गया। फायर विभाग की ओर से भवन मालिक को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में सातवीं और आठवीं मंजिल पर फायर प्रोटेक्शन सिस्टम से जुड़ी कथित कमियों का उल्लेख किया गया और परिसर खाली कराने की मांग की गई।
बाद में संपत्ति मालिक ने कार्यालय खाली करने का नोटिस जारी किया। वहीं, 11 सितंबर को जस्टिस कृष्ण राव की सिंगल बेंच ने फायर विभाग के नोटिस पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
लीज एग्रीमेंट को लेकर भी विवाद
संपत्ति की मालकिन रमादेवी गोयनका की ओर से पेश वकील साग्निका बनर्जी ने अदालत में लीज एग्रीमेंट से जुड़े दावे रखे। उनके मुताबिक, 1 मार्च 2020 को मकान मालिक और युवा तृणमूल के बीच 10 साल की लीज को लेकर समझौता हुआ था।
दावा है कि एग्रीमेंट में यह शर्त थी कि मालिक द्वारा सर्टिफिकेट ऑफ ऑक्यूपेंसी उपलब्ध कराने के बाद कार्यालय का कब्जा दिया जाएगा। मालिक की ओर से आरोप लगाया गया कि सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं कराया जा सका, लेकिन इसके बावजूद तृणमूल ने कार्यालय पर कब्जा कर लिया।
दूसरी ओर, अभिषेक खेमे की ओर से इन आरोपों का विरोध किया गया है। उनका दावा है कि राजनीतिक दबाव के तहत कैमक स्ट्रीट स्थित कार्यालय खाली कराने की कोशिश की जा रही है।
अब हाई कोर्ट के निर्देश के बाद इस विवाद पर सिटी सिविल कोर्ट में सभी पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी और तय समयसीमा के भीतर ‘स्टेटस को’ से जुड़े मुद्दे पर निर्णय लिया जाएगा।
































