TMC के नाम-चिह्न फ्रीज करने के EC के फैसले को दी गयी है चुनौती
नई दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के बीच ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की उम्मीद मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उनकी याचिका को प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के पारंपरिक ‘जोड़ा फूल ’ चुनाव चिह्न को फिलहाल फ्रीज कर दिया गया है।
कपिल सिब्बल ने की तत्काल सुनवाई की मांग
ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में मामले की जल्द सुनवाई का अनुरोध किया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस अनुरोध पर मामले को जल्द सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू की है।
ममता बनर्जी की याचिका चुनाव आयोग के 17 सितंबर के अंतरिम आदेश के खिलाफ है। आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर दो गुटों के बीच नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर नियंत्रण को लेकर विवाद के बीच मूल पार्टी नाम और ‘फूल और घास’ चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी।
उपचुनाव से पहले दोनों गुटों को मिले अलग नाम-चिह्न
आयोग के अंतरिम फैसले के बाद दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए हैं। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है।
दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। ये व्यवस्थाएं आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम आधार पर लागू की गई हैं।
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। ऐसे में चुनाव आयोग के फैसले के बाद दोनों गुटों की चुनावी पहचान अलग हो गई है।
ममता ने EC के फैसले पर उठाए सवाल
चुनाव आयोग के आदेश के बाद ममता बनर्जी ने फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर मामला बताते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पार्टी के नाम और चिह्न को फ्रीज करना उचित नहीं है।
ममता ने इससे पहले महाराष्ट्र में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से जुड़े पार्टी-विभाजन और चुनाव चिह्न विवादों का भी संदर्भ दिया था। हालांकि, इन मामलों की परिस्थितियां और कानूनी प्रक्रियाएं अलग-अलग रही हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट में होगी अहम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में अब मुख्य सवाल चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश की वैधता और उसके प्रभाव से जुड़े होंगे। आयोग का मौजूदा फैसला अंतिम रूप से यह तय नहीं करता कि मूल पार्टी नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न पर स्थायी अधिकार किस गुट का होगा। फिलहाल दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चिह्न के साथ चुनावी प्रक्रिया में आगे बढ़ने की व्यवस्था की गई है।
इस मामले की अगली सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव नजदीक हैं और दोनों गुटों की चुनावी पहचान को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर आगे की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
































