कोलकाता : चुनाव आयोग के फैसले का विरोध करने के बावजूद कालीघाट खेमा अब पार्टी के लिए वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न की प्रक्रिया में आगे बढ़ गया है। सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी के खेमे ने चुनाव आयोग को पार्टी के तीन संभावित नाम और दो चुनाव चिह्नों के विकल्प भेजे हैं। दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी गुट ने भी शुक्रवार सुबह अपने प्रस्तावित नाम और चुनाव चिह्न आयोग को सौंप दिए।
फैसले पर आपत्ति, लेकिन विकल्प भी तैयार
‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘जुड़वां फूल’ चुनाव चिह्न को लेकर आयोग के अंतरिम फैसले के बाद कालीघाट खेमा लगातार इसका विरोध कर रहा है। ममता बनर्जी ने गुरुवार रात चुनाव आयोग को पत्र भेजकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इसके साथ ही पार्टी के लिए वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न भी प्रस्तावित किए गए हैं।
ममता खेमे ने सुझाए तीन नाम
पार्टी सूत्रों के अनुसार, कालीघाट-तृणमूल की ओर से आयोग के सामने तीन वैकल्पिक नाम रखे गए हैं।
पहला नाम ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ बताया जा रहा है। दूसरा विकल्प ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ममता’ है। वहीं तीसरा नाम ‘तृणमूल ममता कांग्रेस’ प्रस्तावित किया गया है।
नामों के साथ कालीघाट खेमे ने दो चुनाव चिह्नों के विकल्प भी दिए हैं। इनमें ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ और ‘बैट’ शामिल हैं।
अब इन नामों और चिह्नों पर चुनाव आयोग की ओर से आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
ऋतब्रत गुट ने भी सौंपे नाम और चिह्न
दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी गुट ने पार्टी के लिए दो नाम प्रस्तावित किए हैं—‘गणतांत्रिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस’।
बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग के पास मुक्त चुनाव चिह्नों की सूची में 184 विकल्प हैं। दोनों गुटों ने इसी सूची में से अपनी पसंद के चिह्नों का प्रस्ताव दिया है।
‘लिफाफा’, ‘ब्लैकबोर्ड’ और ‘टॉर्च’ के विकल्प
जानकारी के मुताबिक, ऋतब्रत गुट ने ‘लिफाफा’, ‘ब्लैकबोर्ड’ और ‘टॉर्च’ जैसे चुनाव चिह्नों के विकल्प दिए हैं। इनमें ‘लिफाफा’ और ‘टॉर्च’ जैसे चिह्न पहले भी अलग-अलग राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों द्वारा इस्तेमाल किए जाते रहे हैं।
आयोग अब दोनों गुटों की ओर से दिए गए पार्टी नामों और चुनाव चिह्नों की समीक्षा करेगा। इसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
1998 से तृणमूल की पहचान रहा है ‘जुड़वां फूल’
ममता बनर्जी ने 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के समय ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न को पार्टी की पहचान बनाया था। करीब 28 साल बाद पहली बार ऐसी स्थिति बनी है, जब इस चिह्न और पार्टी के नाम को लेकर अलग-अलग गुटों के दावे सामने आए हैं।
‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम पर आयोग की रोक के बाद दोनों गुटों को वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न के साथ आगे बढ़ने की स्थिति बन सकती है। हालांकि, दोनों पक्षों के प्रस्तावों में ‘तृणमूल’ शब्द को बनाए रखने की कोशिश दिखाई दे रही है।
‘बैट’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ को लेकर चर्चा
कालीघाट के करीबी सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी के खेमे ने ‘बैट’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ जैसे चिह्नों के लिए आवेदन किया है। दोनों विकल्प चुनाव आयोग की मुक्त चुनाव चिह्नों की सूची में शामिल बताए जा रहे हैं।
इन चिह्नों को लेकर राजनीतिक चर्चा भी शुरू हो गई है। इसकी एक वजह तृणमूल के पुराने चुनावी नारे ‘खेला होबे’ से इनके संभावित जुड़ाव को माना जा रहा है। हालांकि, इन चिह्नों का अंतिम आवंटन पूरी तरह चुनाव आयोग के निर्णय पर निर्भर करेगा।
































