हाई कोर्ट ने छह महीने में रिफंड प्रक्रिया तेज करने को कहा
कोलकाता : रोज़ वैली चिट फंड मामले के जमाकर्ताओं के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत की उम्मीद जगी है। कलकत्ता हाई कोर्ट में गुरुवार को एसेट्स डिस्पोज़ल कमिटी की ओर से बताया गया कि जमाकर्ताओं को अतिरिक्त ₹500 करोड़ लौटाने की प्रक्रिया पूजा से पहले शुरू की जा सकती है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि केवल ₹500 करोड़ का भुगतान पर्याप्त नहीं होगा। अदालत ने रोज़ वैली की जब्त संपत्तियों की बिक्री की प्रक्रिया तेज करने और उससे प्राप्त राशि से बकाया रकम जमाकर्ताओं को लौटाने पर जोर दिया।
अदालत ने समिति से कहा कि वह अगले छह महीनों के भीतर रिफंड की प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास करे। इसके लिए जब्त की गई संपत्तियों को जल्द से जल्द बेचने और उससे मिलने वाली राशि का इस्तेमाल जमाकर्ताओं के भुगतान में करने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
लंबे समय से रिफंड का इंतजार
रोज़ वैली चिट फंड मामले में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी बचत निवेश की थी। बाद में कंपनी पर निवेशकों से जुटाई गई रकम के संबंध में गंभीर आरोप लगे और जांच एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू की।
अदालती कार्रवाई के दौरान रोज़ वैली से जुड़ी कई संपत्तियां और अन्य परिसंपत्तियां जब्त की गईं। इन्हें बेचकर जमाकर्ताओं को उनकी रकम वापस करने की प्रक्रिया चल रही है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पहले अदालत को बताया जा चुका है कि कुछ जमाकर्ताओं को रकम वापस की जा चुकी है। अब हाई कोर्ट के ताजा निर्देश से उन लोगों में उम्मीद बढ़ी है, जिन्हें अभी तक अपना पैसा नहीं मिला है।
कंपनी से जुड़ी विभिन्न संपत्तियों पर कार्रवाई
रोज़ वैली मामले में कंपनी के प्रमुख गौतम कुंडू को ED ने मार्च 2015 में गिरफ्तार किया था। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में कई लोगों से पूछताछ की गई और कंपनी से जुड़ी विभिन्न संपत्तियों पर कार्रवाई हुई।
मामले में गौतम कुंडू की पत्नी शुभ्रा कुंडू के खिलाफ भी जांच हुई और उन्हें CBI की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। जांच के अलग-अलग चरणों में रोज़ वैली से जुड़ी संपत्तियों को जब्त किया गया।
अब हाई कोर्ट के निर्देश के बाद इन परिसंपत्तियों की बिक्री और उससे मिलने वाली राशि को जमाकर्ताओं तक पहुंचाने की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। हालांकि, वास्तविक भुगतान कब और किस प्रक्रिया के तहत होगा, यह परिसंपत्तियों की बिक्री तथा प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगा।
































