लोहार, बढ़ई, कुम्हार, मूर्तिकार से लेकर माला बनाने और जूट की गुड़िया बनाने वाले कारीगर भी होंगे योजना में शामिल
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में कारीगरों और पारंपरिक हुनर से जुड़े लोगों के लिए PM विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत लोहार, बढ़ई, कुम्हार, दर्जी, मूर्तिकार, नाई और माला बनाने वाले कारीगरों समेत कई पारंपरिक पेशों से जुड़े लोगों को आर्थिक और तकनीकी मदद मिलेगी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर कोलकाता के धना-धान्य ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने योजना को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
कई पारंपरिक पेशे योजना के दायरे में
मुख्यमंत्री ने बताया कि सुनार, चमड़े का काम करने वाले, निर्माण कार्य से जुड़े कारीगर, लोहार, कुम्हार, बढ़ई, दर्जी और मूर्तिकार इस योजना का लाभ ले सकेंगे। इसके अलावा मछली पकड़ने वाली नाव और जाल बनाने वाले कारीगर भी योजना में शामिल होंगे।
नाई, माला बनाने वाले, सीप से सामान बनाने वाले तथा मिट्टी, लकड़ी और जूट की गुड़िया बनाने वाले लोगों को भी योजना का लाभ दिया जाएगा।
ट्रेनिंग से लेकर टूलकिट और कम ब्याज वाले कर्ज की सुविधा
योजना के तहत लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही प्रशिक्षण के दौरान भत्ता और काम से जुड़े जरूरी औजारों की किट उपलब्ध कराई जाएगी।
कारीगरों को अपना काम बढ़ाने के लिए कम ब्याज पर बैंक ऋण की सुविधा भी दी जाएगी। सरकार के अनुसार, इस ऋण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गारंटर की भूमिका निभाएंगे।
‘कारीगरों को सर्टिफिकेट नहीं, हुनर की जरूरत‘
सुवेंदु अधिकारी ने पारंपरिक कारीगरों के हुनर की तारीफ करते हुए कहा कि हाथ से काम करने के लिए किसी अकादमिक प्रमाणपत्र से ज्यादा जरूरी कौशल होता है। उन्होंने कहा कि इन कारीगरों का हुनर पीढ़ियों से आगे बढ़ता आया है और इसे बचाने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में पहले PM विश्वकर्मा योजना को लागू नहीं किया गया। उनके अनुसार, इसी वजह से राज्य के कई पारंपरिक कारीगर दूसरे राज्यों में जाकर काम करने को मजबूर हुए।
मई से शुरू हुई थी योजना लागू करने की प्रक्रिया
पश्चिम बंगाल में PM विश्वकर्मा योजना को लागू करने की प्रशासनिक प्रक्रिया इस साल मई में शुरू हुई थी। 14 मई को राज्य सरकार की ओर से अधिसूचना जारी किए जाने के बाद राज्य स्तर पर निगरानी समिति और जिला स्तर पर कार्यान्वयन समितियां बनाई गईं।
इसके बाद पात्र लाभार्थियों की पहचान, सत्यापन और पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई। राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं।
2027 में ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होगा विश्वकर्मा दिवस
विश्वकर्मा पूजा से पहले मुख्यमंत्री ने दूसरे राज्यों में काम कर रहे बंगाल के कारीगरों से वापस अपने घर लौटने की अपील की।
उन्होंने घोषणा की कि 17 सितंबर 2027 को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में विश्वकर्मा दिवस मनाया जाएगा। इस मौके पर कम से कम पांच लाख लाभार्थियों की बड़ी सभा आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
































