‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न पर आयोग का फैसला अब भी बाकी
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में दो विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस का अंदरूनी विवाद और गहरा गया है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट ने दोनों सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। दूसरी ओर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से भी उम्मीदवारों की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। ऐसे में दोनों सीटों पर अब एक ही पार्टी के दो गुटों के बीच आमने-सामने मुकाबले की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।
दोनों गुटों ने ठोका पार्टी पर दावा
उपचुनाव को लेकर सबसे बड़ा सवाल सिर्फ उम्मीदवारों का नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के नाम और ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न को लेकर है। ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी—दोनों गुट खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताते हुए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा कर रहे हैं।
दोनों पक्षों की ओर से चुनाव आयोग के समक्ष अपने-अपने दावे और दस्तावेज पेश किए गए हैं। आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी हैं और कुछ अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे हैं।
‘जोड़ाफूल’ पर फैसला अभी बाकी
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उपचुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद चुनाव आयोग ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न और तृणमूल कांग्रेस का आधिकारिक दर्जा किस गुट को मिलेगा। आयोग के फैसले पर ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों में से कौन-सा गुट पार्टी के आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतर पाएगा।
अगर किसी एक गुट को ‘जोड़ाफूल’ नहीं मिलता है, तो उसे वैकल्पिक चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ना पड़ सकता है। ऐसे में मतदाताओं के बीच पार्टी की पहचान को लेकर भी भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
दो सीटों पर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
दोनों सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा के बाद उपचुनाव का मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर क्या फैसला करता है। आयोग का निर्णय दोनों गुटों की चुनावी रणनीति और उनके राजनीतिक दावे पर सीधा असर डाल सकता है।
इस तरह दोनों विधानसभा सीटों का उपचुनाव सिर्फ उम्मीदवारों के बीच मुकाबला नहीं रह गया है। यह तृणमूल कांग्रेस के भीतर वर्चस्व की लड़ाई और पार्टी के आधिकारिक नाम व ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न पर अधिकार की परीक्षा भी बन गया है।
दोनों गुटों ने नंदीग्राम और रेजीनगर के लिए ये उम्मीदवार घोषित किए हैं:
| विधानसभा सीट | ममता बनर्जी गुट | ऋतब्रत बनर्जी गुट |
| नंदीग्राम | संचिता प्रधान (दे) | मोहम्मद एतेशामुल हक |
| रेजीनगर | रबीउल आलम चौधरी | सफीउद्दीन शेख |
ममता गुट ने 13 सितंबर को संचिता प्रधान (डे) और रबीउल आलम चौधरी के नाम घोषित किए थे।
वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने 14 सितंबर को नंदीग्राम से मोहम्मद एतेशामुल हक और रेजीनगर से सफीउद्दीन शेख को उम्मीदवार बनाया है।
यानी दोनों सीटों पर सीधा मुकाबला अब ‘तृणमूल बनाम तृणमूल’ का बन गया है। हालांकि, दोनों गुटों में से ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न किसे मिलेगा, इस पर चुनाव आयोग का अंतिम फैसला अभी बाकी है।
































