जगदीश का दावा – पूजा से पहले हो सकता है बड़ा राजनीतिक फेरबदल
नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक और बड़े राजनीतिक बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। तृणमूल कांग्रेस से बगावत कर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 लोकसभा सांसदों में से 17 के भाजपा में जाने का दावा किया गया है। यह दावा कूचबिहार के सांसद जगदीशचंद्र बर्मा बसुनिया ने सोमवार को किया। उनके मुताबिक, पूजा से पहले ही इन सांसदों के भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया पूरी हो सकती है।
तीन सांसद भाजपा में नहीं जाएंगे
जगदीश के अनुसार, मुर्शिदाबाद के तीन अल्पसंख्यक सांसद अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान सीधे भाजपा में शामिल नहीं होंगे। हालांकि, उनका दावा है कि तीनों एनडीए का समर्थन करेंगे और सरकार के साथ बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इन सांसदों को अलग-अलग जिम्मेदारियां या विभाग दिए जा सकते हैं।
जगदीश ने कहा कि अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इन तीनों सांसदों ने सीधे भाजपा में शामिल होने से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है।
दल-बदल कानून से बचने का दावा
जगदीश का कहना है कि एनसीपीआई में कुल 20 सांसद हैं और इनमें से 17 के भाजपा में जाने पर दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता का संकट नहीं आएगा। उन्होंने दावा किया कि दो-तिहाई सांसदों के साथ होने के कारण यह कदम कानूनी रूप से सुरक्षित रहेगा।
उनके मुताबिक, सभी सांसद पहले सीधे भाजपा में शामिल होना चाहते थे, लेकिन तीन अल्पसंख्यक सांसदों की आपत्ति के बाद उन्हें एनसीपीआई के साथ जोड़ा गया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा नेताओं की पहल पर यह राजनीतिक व्यवस्था बनाई गई थी।
लोकसभा रिकॉर्ड में अभी भी तृणमूल सांसद
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर कानूनी और संसदीय स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। लोकसभा के रिकॉर्ड के अनुसार, ये 20 सांसद अब भी तृणमूल कांग्रेस के ही सांसद हैं। उन्होंने एनसीपीआई के सांसद के रूप में मान्यता देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अनुरोध किया था, लेकिन अभी तक इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद बढ़ी हलचल
20 सांसदों की सदस्यता से जुड़े मामले में अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद 25 अगस्त को शीर्ष अदालत ने एनसीपीआई के 20 सांसदों को नोटिस जारी किया। अगले दिन लोकसभा अध्यक्ष के सचिवालय ने भी सभी सांसदों से जवाब मांगा था।
सांसदों ने जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी, जिसे स्वीकार करते हुए 22 सितंबर तक का समय दिया गया है।
इस बीच, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता देवजीत सरकार ने जगदीश के दावे से दूरी बनाते हुए कहा कि पार्टी में इस तरह की कोई जानकारी नहीं है और इस बयान की पूरी जिम्मेदारी जगदीश की ही है।
































