कोलकाता : ईस्ट जादवपुर थाना क्षेत्र के दिनेश नगर में पुलिस ने ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी और जुए के कथित रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए झारखंड के चार युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी धनबाद जिले के रहने वाले हैं और लंबे समय से कोलकाता में रहकर कथित तौर पर ऑनलाइन सट्टेबाजी का संचालन कर रहे थे। हालांकि, इस नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड अब भी फरार हैं।
सट्टेबाजी का कारोबार
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 7 सितंबर की रात सूचना मिली थी कि ईस्ट जादवपुर के दिनेश नगर स्थित एक फ्लैट में बड़े पैमाने पर ऑनलाइन जुआ और क्रिकेट सट्टेबाजी चल रही है। यह भी आरोप था कि ऑनलाइन जुए के जरिए लोगों को झांसे में लेकर उनसे बड़ी रकम वसूली जा रही थी।
सूचना मिलने के बाद ईस्ट जादवपुर थाने के सब-इंस्पेक्टर दीपक मंडल के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने फ्लैट पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान चार लोगों को गिरफ्तार किया गया।
धनबाद के रहने वाले हैं सभी आरोपी
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सौरव कुमार सिंदुरिया (27), ओमप्रकाश साव (24), विकास कुमार वर्मा (32) और धीरज कुमार ठाकुर (24) के रूप में हुई है। सौरव और ओमप्रकाश झरिया के रहने वाले हैं, जबकि विकास कुमार वर्मा खास झरिया और धीरज कुमार ठाकुर धनबाद के जोरापोखर थाना क्षेत्र के जामाडोबा इलाके का निवासी बताया गया है।
पुलिस से बचने के लिए कोलकाता को बनाया था ठिकाना
पूछताछ में पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि इस नेटवर्क में कई अन्य लोग भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, पवन साव और रोहित नाम के दो लोगों की देखरेख में यह रैकेट संचालित किया जा रहा था। आरोप है कि धनबाद के इन युवकों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए कोलकाता में ठिकाना बनाया था।
पुलिस का कहना है कि आरोपी ऑनलाइन सट्टेबाजी या जुए के कारोबार से संबंधित कोई वैध दस्तावेज या लाइसेंस पेश नहीं कर सके। पूछताछ और जांच के आधार पर आपराधिक साजिश तथा धोखाधड़ी से जुड़े साक्ष्य मिलने के बाद 8 सितंबर की सुबह चारों को गिरफ्तार किया गया।
मास्टरमाइंड की तलाश जारी
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पश्चिम बंगाल जुआ एवं पुरस्कार प्रतियोगिता अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब फरार बताए जा रहे पवन साव और रोहित समेत नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। साथ ही, जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस कथित ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क का संचालन कितने समय से किया जा रहा था और इसमें कितने लोग जुड़े हुए थे।






























