जादवपुर यूनिवर्सिटी के काउंसलिंग सेंटर में हर साल 300 से अधिक छात्र लेते हैं मनोवैज्ञानिक परामर्श
कोलकाता : करियर को लेकर माता-पिता की अपेक्षाएं कई बार बच्चों पर भारी पड़ सकती हैं। जादवपुर यूनिवर्सिटी के काउंसलिंग सेंटर में हर शैक्षणिक वर्ष 300 से अधिक छात्र मनोवैज्ञानिक परामर्श के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की है, जो अपनी पसंद के बजाय माता-पिता के दबाव में किसी विषय की पढ़ाई कर रहे हैं।
यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर फॉर काउंसलिंग सर्विसेज एंड स्टडीज़ इन सेल्फ-डेवलपमेंट’ के प्रोफेसर समर कुमार मंडल के अनुसार, छात्रों के काउंसलिंग लेने के पीछे कई कारण होते हैं। इनमें माता-पिता की अपेक्षाओं और दबाव की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
‘मुझे इस विषय में कोई दिलचस्पी नहीं’
काउंसलिंग के दौरान कई छात्र अपनी परेशानी जाहिर करते हुए कहते हैं कि उन्हें विज्ञान या इंजीनियरिंग में कोई रुचि नहीं है, लेकिन वे सिर्फ माता-पिता की उम्मीदों को पूरा करने के लिए इन विषयों की पढ़ाई कर रहे हैं।
प्रोफेसर समर कुमार मंडल के मुताबिक, कई माता-पिता अपने बच्चों के जरिए अपने अधूरे सपने पूरे करना चाहते हैं। वे अपनी इच्छाएं बच्चों पर थोप देते हैं और यह समझने की कोशिश नहीं करते कि बच्चे की वास्तविक रुचि किस क्षेत्र में है। इसके चलते छात्र अपनी पसंद के विपरीत विषय पढ़ते हुए मानसिक तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं का सामना कर सकते हैं।
साइंस और इंजीनियरिंग को लेकर बनी धारणा
समर कुमार मंडल ने बताया कि इसके पीछे मुख्य रूप से दो कारण दिखाई देते हैं। पहला, समाज में यह धारणा मजबूत है कि साइंस या इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने से जल्दी और अधिक कमाई के अवसर मिलते हैं। दूसरा कारण सामाजिक प्रतिष्ठा है।
उनके अनुसार, कई माता-पिता मानते हैं कि अगर उनका बच्चा साहित्य या अन्य मानविकी विषयों के बजाय इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र में पढ़ाई करेगा, तो परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। इसी सोच के कारण बच्चों की व्यक्तिगत रुचि कई बार पीछे छूट जाती है।
IIT और कोटा में बढ़ते दबाव पर चिंता
कार्यक्रम में मौजूद जादवपुर यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर चिरंजीब भट्टाचार्य ने भी छात्रों पर बढ़ते शैक्षणिक और सामाजिक दबाव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां गंभीर चिंता का विषय हैं।
उन्होंने IIT खड़गपुर, IIT बॉम्बे और कोटा जैसे शिक्षा केंद्रों में सामने आने वाली आत्महत्या की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कई छात्र माता-पिता की अपेक्षाओं और प्रतिस्पर्धा के दबाव से जूझते हैं। उनके अनुसार, दुनिया भर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ‘चूहा-दौड़’ जैसी स्थिति छात्रों पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है।
माता-पिता से बोले VC- बच्चों पर न थोपें अपनी पसंद
चिरंजीब भट्टाचार्य ने काउंसिल ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान स्कूलों के दौरे का अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि छात्रों पर करियर को लेकर अत्यधिक दबाव की समस्या कई जगह देखने को मिली है।
उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे बच्चों को केवल डॉक्टर या इंजीनियर बनाने की कोशिश न करें। बच्चों की रुचि, क्षमता और पसंद को समझकर उन्हें अपने करियर का चुनाव करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
आत्महत्या रोकथाम दिवस पर विशेष कार्यक्रम
जादवपुर यूनिवर्सिटी में गुरुवार को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। एक दिवसीय सेमिनार का विषय ‘आत्महत्या की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता’ था। कार्यक्रम का आयोजन यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर काउंसलिंग सर्विसेज एंड स्टडीज़ इन सेल्फ-डेवलपमेंट की ओर से किया गया। इसमें डीन ऑफ स्टूडेंट्स राजीव पतितृप्ति, वाइस-चांसलर चिरंजीब भट्टाचार्य, प्रो-वाइस-चांसलर अमिताभ दत्ता, रजिस्ट्रार देबजीत दत्ता और इंटरनेशनल साइकोएनालिटिकल एसोसिएशन की क्लाइमेट कमिटी की सदस्य डॉ. पुष्पा मिश्रा समेत अन्य लोग मौजूद रहे।






























