नई दिल्ली: विदेशों में छिपे फरार अपराधियों को भारत वापस लाने में मिली हालिया सफलताओं को सरकार ने महज संयोग नहीं, बल्कि मजबूत विश्वसनीयता, ठोस कानूनी तैयारी, लगातार कूटनीतिक प्रयास और निरंतर फॉलो-अप का परिणाम बताया है। केंद्र सरकार का कहना है कि इस अभियान में विभिन्न केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सरकार के अनुसार, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), प्रवर्तन निदेशालय (ED), विदेश मंत्रालय (MEA), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), डीजीजीआई (DGGI) तथा विभिन्न राज्यों की पुलिस ने मिलकर “Whole-of-Government” दृष्टिकोण अपनाया है। इस समन्वित प्रयास का उद्देश्य फरार अपराधियों को भारत वापस लाना और पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाना है।
IB के MAC के अंतर्गत Standing Focus Group का गठन
जनवरी 2026 में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के अंतर्गत Standing Focus Group का गठन किया गया। इसे भारत की फरार अपराधी प्रबंधन प्रणाली को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा संस्थागत कदम माना जा रहा है।
यह समूह कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाएगा, जिनमें शामिल हैं:
- फरार अपराधियों के मामलों को प्राथमिकता देना।केस डोजियर का मानकीकरण करना।सूचनाओं की कमी को दूर करना।विदेशी एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय और फॉलो-अप सुनिश्चित करना।राज्यों द्वारा शुरू किए गए मामलों को राष्ट्रीय स्तर पर सहायता उपलब्ध कराना
- विदेश में छिपे अपराधी अब ‘डॉर्मेंट केस’ नहीं
- सरकार ने स्पष्ट किया है कि विदेशों में सक्रिय फरार अपराधियों को अब केवल पुराने या निष्क्रिय केस के रूप में नहीं देखा जा सकता। ऐसे अपराधी राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए लगातार खतरा बने रहते हैं। इसलिए उनके खिलाफ सतत, समन्वित और सक्रिय कार्रवाई आवश्यक है।भारत सरकार का मानना है कि केंद्र और राज्यों की संयुक्त रणनीति से भविष्य में भी फरार अपराधियों की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी होगी।





























