केंद्र ने भी दिए थे निर्देश
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में जनगणना 2027 (Census 2027) की तैयारियां तेज़ हो गई हैं। इसी बीच राज्य के जनगणना संचालन निदेशालय (Directorate of Census Operations, West Bengal) ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।
10 जुलाई 2026 को जारी पत्र में जनगणना संचालन निदेशक एवं मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी निखिल पवन कल्याण (IAS) ने राज्य के नोडल अधिकारी (जनगणना) एवं वरिष्ठ प्रमुख सचिव नितिन सिंघानिया (IAS) को संबोधित करते हुए कहा है कि जनगणना 2027 का कार्य पूरे राज्य में तेजी से चल रहा है। ऐसे समय में विभिन्न जिलों के बीच अधिकारियों और कर्मचारियों के लगातार हो रहे तबादले जनगणना कार्य को प्रभावित कर सकते हैं।
प्रशिक्षित कर्मचारियों के तबादले से काम पर असर
पत्र में कहा गया है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को मास्टर ट्रेनर, फील्ड ट्रेनर, सुपरवाइजर, एन्यूमरेटर (गणनाकर्मी) सहित अन्य जिम्मेदारियों के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है, उनके तबादले से प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता प्रभावित होगी। इससे जनगणना के पहले चरण को समय पर पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
इसी कारण सभी संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला फिलहाल रोकने का अनुरोध किया गया है।
30 सितंबर 2026 तक तबादला नहीं करने की अपील
राज्य के जनगणना निदेशालय ने अपने पत्र में कहा है कि हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (House Listing Operation-HLO), जो जनगणना के पहले चरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है, 30 सितंबर 2026 तक निर्धारित है। इसलिए इस अवधि तक जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों को उनके वर्तमान पदों पर बनाए रखा जाए।
गृह सचिव ने मार्च में सभी राज्यों को भेजा था पत्र
इस पत्र का आधार 11 मार्च 2026 को भारत सरकार के गृह सचिव गोविंद मोहन (IAS) द्वारा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजा गया पत्र है।
गृह सचिव ने अपने पत्र में स्पष्ट किया था कि जनगणना 2027 पूरी तरह डिजिटल तरीके से दो चरणों में होगी और इसमें सेल्फ एन्यूमरेशन (Self Enumeration) की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
पत्र के अनुसार—
पहला चरण हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग सेंसस अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा।
दूसरा चरण जनसंख्या गणना (Population Enumeration) फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। जबकि लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में यह कार्य सितंबर 2026 में कराया जाएगा।
31 मार्च 2027 तक तबादला नहीं करने का सुझाव
गृह सचिव ने राज्यों से कहा था कि जनगणना के लिए नियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों का 31 मार्च 2027 तक तबादला नहीं किया जाए। उनका कहना था कि एक बार जनगणना कार्य में नियुक्ति होने के बाद अधिकारियों को पूरी जनगणना प्रक्रिया पूरी होने तक उसी जिम्मेदारी पर बनाए रखना जरूरी है, ताकि कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
जनगणना देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायदों में से एक है। इसमें करोड़ों परिवारों और नागरिकों का डेटा एकत्र किया जाता है। प्रशिक्षित कर्मचारियों के स्थानांतरण से प्रशिक्षण प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ सकती है, जिससे समय और संसाधनों दोनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। इसी वजह से केंद्र और राज्य स्तर पर जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों की स्थिर तैनाती पर जोर दिया जा रहा है।
प्रमुख बातें
पश्चिम बंगाल में जनगणना कार्य से जुड़े अधिकारियों के तबादले पर रोक लगाने का अनुरोध।
10 जुलाई 2026 को राज्य के जनगणना निदेशालय ने जारी किया पत्र।
30 सितंबर 2026 तक हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन पूरा करने का लक्ष्य।
केंद्र सरकार पहले ही सभी राज्यों को 31 मार्च 2027 तक जनगणना कर्मियों का तबादला न करने की सलाह दे चुकी है।
जनगणना 2027 दो चरणों में और डिजिटल माध्यम से आयोजित होगी, जिसमें सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा भी होगी।
स्वपन मंडल, महासचिव, जनगणना कर्मचारी एकता मंच ने कहा:”हमारा मानना है कि यह फैसला सही है। जो कर्मचारी जनगणना के कार्य में लगे हैं, वे एक निर्धारित क्षेत्र की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यदि उन्हें बीच में किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा, तो जनगणना कार्य प्रभावित होगा और काम में कठिनाइयां आएंगी। हालांकि, सभी कर्मचारियों की जनगणना ड्यूटी नहीं है। ऐसे कर्मचारियों के मामले में क्या व्यवस्था होगी, इस पर भी सरकार को स्पष्टता लानी चाहिए।”






























