कोलकाता: पश्चिम बंगाल में Census 2027 (जनगणना 2027) को लेकर शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जिला विद्यालय निरीक्षक (District Inspector of Schools), कोलकाता की ओर से जारी एक आधिकारिक ज्ञापन में स्कूलों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया गया है कि वे शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की जनगणना कार्य में अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित करें।
ज्ञापन में जनगणना अधिनियम, 1948 का हवाला देते हुए कहा गया है कि जनगणना ड्यूटी से इनकार करने पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
इधर, सेंसस कर्मचारी ऐक्य मंच के महासचिव स्वपन मंडल ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि बड़ी संख्या में शिक्षकों और शिक्षिकाओं को जनगणना कार्य में लगाए जाने से आने वाले महीनों में स्कूलों में नियमित पढ़ाई प्रभावित होगी। उन्होंने दावा किया कि यदि यही स्थिति बनी रही तो कई स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था बाधित हो सकती है।
स्वपन मंडल ने कहा, “जिस तरह शिक्षकों को जनगणना कार्य के लिए स्कूलों से हटाया जा रहा है, उससे आने वाले महीनों में स्कूल बंद करने जैसी स्थिति बन सकती है। सरकार छात्रों के हितों की अनदेखी कर रही है और शिक्षकों को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी देकर दबाव बनाया जा रहा है।”
हालांकि, सरकार की ओर से जारी निर्देश में जनगणना कार्य को लोकहित से जुड़ा अनिवार्य दायित्व बताया गया है और सभी संबंधित संस्थानों से इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।






























