शिक्षा विभाग ने जिलाधिकारियों को भेजा तात्कालिक निर्देश
स्कूलों से केंद्रीय वाहिनी को हटाने के लिए कहा गया
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 समाप्त होने और ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद 1 जून से स्कूलों में शिक्षण कार्य शुरू हो चुका है। इसके बावजूद राज्य के 165 स्कूलों पर अब भी केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल (CAPF) का कब्जा बना हुआ है, जिससे पढ़ाई-लिखाई का काम गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए सभी जिलाधिकारियों और कोलकाता पुलिस आयुक्त को तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। विभाग की ओर से 10 जून 2026 को जारी एक आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि कई स्कूल अभी भी CAPF कैंप के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जिसके कारण छात्रों की नियमित कक्षाएं संचालित नहीं हो पा रही हैं।
पत्र में अतिरिक्त मुख्य सचिव ने जिलों को निर्देश दिया है कि CAPF को जल्द से जल्द किसी वैकल्पिक गैर-शैक्षणिक परिसर में स्थानांतरित किया जाए, ताकि स्कूलों में सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां बहाल की जा सकें।
किन जिलों में सबसे अधिक प्रभावित स्कूल?
शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार:
दक्षिण 24 परगना में सबसे अधिक 35 स्कूल प्रभावित हैं।
उत्तर 24 परगना में 25 स्कूल अब भी CAPF कैंप के कब्जे में हैं।
मुर्शिदाबाद में 14 स्कूल प्रभावित हैं।
कोलकाता में 9 स्कूल प्रभावित बताए गए हैं।
बीरभूम, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, हुगली और अन्य जिलों के कई स्कूल भी सूची में शामिल हैं।
रिपोर्ट में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के नाम भी दर्ज किए गए हैं, जहां चुनाव के बाद भी CAPF की तैनाती जारी है।
शिक्षा विभाग की चिंता
विभाग का कहना है कि स्कूल परिसरों का लंबे समय तक सुरक्षा बलों के लिए उपयोग छात्रों की पढ़ाई और स्कूल प्रशासन दोनों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। गर्मी की छुट्टियां समाप्त होने के बाद भी कक्षाएं शुरू नहीं हो पाने से हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
शिक्षा विभाग ने जिला प्रशासन से तत्काल समन्वय कर समस्या का समाधान करने और स्कूल भवनों को जल्द से जल्द शिक्षा कार्य के लिए मुक्त कराने को कहा है।
यह कहा शिक्षक संगठन ने
यह फैसला चुनाव परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद ही लिया जाना चाहिए था। 1 जून से स्कूल खुल चुके हैं, लेकिन दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी केंद्रीय बल कई शैक्षणिक संस्थानों में मौजूद रहे। यह बात इतनी देर से क्यों याद आई?
हालांकि, देर से ही सही, हम इस निर्णय का समर्थन करते हैं। लेकिन भविष्य में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस तरह की स्थिति की पुनरावृत्ति न हो और शैक्षणिक संस्थानों का सामान्य शैक्षणिक वातावरण प्रभावित न हो।
— स्वपन मंडल,
सामान्य सचिव, बंगीय शिक्षक एवं शिक्षाकर्मी समिति।


























