कोलकाता: देशभर के लाखों शिक्षकों के सामने टेट (Teacher Eligibility Test) अनिवार्यता का मुद्दा गंभीर चिंता का कारण बन गया है। पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया था कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के सभी शिक्षकों के लिए टेट उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा। हाल ही में शीर्ष अदालत ने पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज करते हुए अपने फैसले को बरकरार रखा, हालांकि शिक्षकों को टेट पास करने के लिए एक वर्ष की अतिरिक्त मोहलत देते हुए समयसीमा 2028 तक बढ़ा दी गई है।इसी मुद्दे को लेकर बुधवार दोपहर करीब 1 बजे कोलकाता के सुवोध मलिक स्क्वायर से कॉलेज स्क्वायर तक विभिन्न शिक्षक संगठनों ने विशाल रैली निकाली और धरना-प्रदर्शन किया। इस आंदोलन में अखिल बंग प्राथमिक शिक्षक समिति, अखिल बंग शिक्षक समिति, बंगीय शिक्षक एवं शिक्षाकर्मी समिति सहित कई संगठनों ने भाग लिया।प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि टेट अनिवार्यता से बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षक असमंजस और असुरक्षा की स्थिति में हैं। उनका आरोप है कि न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान दे रही है।शिक्षकों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह जल्द से जल्द अध्यादेश (ऑर्डिनेंस) जारी कर टेट संबंधी जटिलताओं से उन्हें राहत दे। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे और बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।अखिल बंग प्राथमिक शिक्षक समिति के महासचिव ध्रुवशेखर मंडल ने कहा, “हमारी मांग है कि सरकार हमें इस टेट संकट से मुक्त करे। इस मुद्दे को लेकर कई बार सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है। केंद्र सरकार को जल्द अध्यादेश जारी कर शिक्षकों को राहत देनी चाहिए।”शिक्षकों ने यह भी याद दिलाया कि विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने पर शिक्षकों के हितों की रक्षा का आश्वासन दिया था। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने सरकार से उस वादे को पूरा करने की मांग की।सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति अगले पांच वर्षों के भीतर होने वाली है, उन्हें इस अनिवार्यता से छूट दी गई है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक इस फैसले को लेकर चिंतित हैं और समाधान की मांग कर रहे हैं।


























