शिक्षकों-कर्मचारियों की भागीदारी अनिवार्य
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के सभी स्कूलों में 7 अक्टूबर 2026 को Inclusive Education (समावेशी शिक्षा) पर 30 मिनट का Sensitization और Orientation Module दिखाया जाएगा। पश्चिम बंग समग्र शिक्षा मिशन (PBSSM) ने सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।
यह पहल विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (Children with Special Needs-CwSN) के प्रति स्कूल स्टाफ में संवेदनशीलता, सहानुभूति और समावेशी दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
7 अक्टूबर को स्कूलों में दिखाया जाएगा वीडियो मॉड्यूल
केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के School Education & Literacy Department की ओर से 30 सितंबर 2026 को जारी पत्र के आधार पर यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। पत्र के अनुसार करीब 30 मिनट का वीडियो ओरिएंटेशन मॉड्यूल 7 अक्टूबर को देशभर के स्कूलों में दिखाया जाना प्रस्तावित है।
मॉड्यूल 12 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगा। इसमें व्यावहारिक उदाहरण और इंटरैक्टिव गतिविधियों के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की जरूरतों और चुनौतियों को समझाने का प्रयास किया जाएगा।
शिक्षकों के साथ गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भी भागीदारी
निर्देश के मुताबिक कार्यक्रम में स्कूल के सभी Teaching और Non-Teaching Staff को शामिल किया जाना है। इनमें शिक्षक, आया, ड्राइवर, क्लेरिकल स्टाफ, रिसेप्शनिस्ट, डीन, वार्डन और Head of School (HoS) सहित अन्य कर्मचारी शामिल हैं।
स्कूलों को कार्यक्रम इस तरह आयोजित करने के लिए कहा गया है कि जरूरी शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों और अधिकतम कर्मचारी इसमें भाग ले सकें।
PRASHAST पोर्टल पर उपलब्ध होगा मॉड्यूल
दस्तावेज के अनुसार यह मॉड्यूल PRASHAST पोर्टल पर 7 अक्टूबर 2026 से उपलब्ध होगा। स्कूल इसे पोर्टल के Headmaster Login के जरिए देख सकेंगे। वीडियो देखने से संबंधित जानकारी राष्ट्रीय, राज्य और ब्लॉक स्तर के लॉगिन पर भी उपलब्ध होगी।
PRASHAST पहल से जुड़ा है कार्यक्रम
यह कार्यक्रम चालू शैक्षणिक वर्ष में चल रही PRASHAST Screening Initiative का हिस्सा है। इसका उद्देश्य छात्रों में संभावित दिव्यांगताओं की शुरुआती पहचान कर समय पर हस्तक्षेप और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना है।
पश्चिम बंगाल समग्र शिक्षा मिशन ने सभी जिलों में इस निर्देश का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और स्कूलों में इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा है।































