महिला शक्ति भारत के विकास की बड़ी ताकत, उद्यमिता में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी महत्वपूर्ण : राज्यपाल आर.एन. रवि
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि ने शनिवार को कोलकाता स्थित लोक भवन में आयोजित JITO National Women Entrepreneurs Summit में महिला उद्यमियों से संवाद किया। यह सम्मेलन JITO लेडीज विंग की ओर से आयोजित किया गया था, जिसकी अध्यक्षता JITO लेडीज विंग की चेयरपर्सन शीतल दुग्गड़ ने की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि नारी शक्ति ने परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यतागत यात्रा में महिलाओं का योगदान बेहद व्यापक रहा है और उसका बड़ा हिस्सा औपचारिक रूप से दर्ज या मापा भी नहीं जा सकता।
महिलाओं के लिए अवसरों का बढ़ता दायरा
राज्यपाल ने कहा कि महिलाओं की अंतर्निहित शक्ति को अब ऐसा वातावरण मिल रहा है, जिसमें सम्मान, विश्वास और अवसर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इससे महिलाएं अपनी क्षमता को नए स्तर पर सामने ला रही हैं और उद्यमिता तथा नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शासन व्यवस्था में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास अब केवल सरकार-केंद्रित नहीं, बल्कि जन-केंद्रित हो रहा है। उनके मुताबिक, बुनियादी सुविधाओं से लेकर डिजिटल ढांचे और उद्यमिता के अवसरों तक कई बदलावों ने महिलाओं के लिए नए रास्ते खोले हैं।
छोटे कारोबार से अंतरिक्ष और लड़ाकू विमान तक पहुंची महिलाएं
राज्यपाल ने मुद्रा योजना (MUDRA) जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के जमीनी स्तर पर महिलाओं के नेतृत्व में छोटे-छोटे कारोबार और उद्यम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी अब माइक्रो एंटरप्राइज और स्टार्टअप से आगे बढ़कर विज्ञान, अंतरिक्ष और लड़ाकू विमान उड़ाने जैसे क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है।
उन्होंने इसे विकसित भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव बताया।
26 महिला उद्यमियों का सम्मान
राज्यपाल ने JITO लेडीज विंग की ओर से महिला उद्यमियों को एक मंच पर लाने और नेतृत्व को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करने वाली 26 महिला उद्यमियों को सम्मानित किया गया।
जैन आचार्यों और संतों के योगदान को किया याद
राज्यपाल ने भारत की सभ्यतागत यात्रा में जैन आचार्यों, मुनियों और ऋषियों के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने अहिंसा तथा भारतीय संस्कार, धर्म और संस्कृति के संरक्षण और प्रसार में उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया के सामने संघर्ष और विभाजन जैसी चुनौतियां हैं, तब ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना के साथ भारत शांति, सद्भाव और सह-अस्तित्व का संदेश दे सकता है।
सम्मेलन में 200 से अधिक महिला उद्यमियों के साथ कारोबार और उद्योग जगत से जुड़े कई प्रमुख लोगों ने हिस्सा लिया।































