अनारॉक सर्वे में सामने आया ट्रेंड, 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये का बजट सबसे पसंदीदा; बढ़ती कीमतों के बावजूद घर खरीदने की इच्छा कायम
मुंबई : भारत में घर खरीदने वालों की पसंद लगातार बड़े और बेहतर घरों की ओर बढ़ रही है। अनारॉक के कंज्यूमर सेंटिमेंट सर्वे-एच1 2026 के मुताबिक, 48% लोगों ने 3BHK घरों को अपनी पहली पसंद बताया है। वहीं, 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये के बीच की कीमत वाला बजट वर्ग सबसे अधिक पसंद किया गया।
यह सर्वे 14 शहरों में 23 से 77 वर्ष की उम्र के 8,320 लोगों के बीच किया गया। आंकड़ों से पता चलता है कि घर खरीदार अब केवल कीमत नहीं, बल्कि ज्यादा जगह, बेहतर सुविधाओं और लंबे समय के उपयोग को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
3BHK की मांग सबसे ज्यादा
सर्वे में 48% लोगों ने 3BHK को पसंद किया, जबकि 38% की पसंद 2BHK रही। वहीं, 4BHK और उससे बड़े घरों की मांग भी बढ़ी है। एच1 2024 में जहां करीब 3% खरीदार ऐसे घर पसंद कर रहे थे, वहीं एच1 2026 में यह आंकड़ा लगभग 5% पहुंच गया।
शहरों के हिसाब से अहमदाबाद में 3BHK की मांग सबसे अधिक 57% रही। चेन्नई और दिल्ली-एनसीआर में यह 53% और हैदराबाद में 52% रही। बेंगलुरु और कोलकाता में 46%, जबकि पुणे में 47% खरीदारों ने 3BHK को प्राथमिकता दी। मुंबई महानगर क्षेत्र में यह आंकड़ा 39% रहा।
90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये का बजट सबसे पसंदीदा
बड़े घरों की बढ़ती मांग के साथ खरीदारों का बजट भी ऊपर गया है। 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये की कीमत वाला वर्ग अब सबसे पसंदीदा बजट श्रेणी बन गया है। दूसरी ओर, 45 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की प्राथमिकता पिछले कुछ वर्षों में कम हुई है।
अनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी के मुताबिक, सर्वे के नतीजे बताते हैं कि आवासीय बाजार में प्रीमियम घरों की मांग लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार, यह रुझान केवल निवेशकों तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने इस्तेमाल के लिए घर खरीदने वाले लोगों में भी दिखाई दे रहा है।
महंगे घरों के बावजूद खरीदारी की इच्छा कायम
घर की बढ़ती कीमतें खरीदारों के लिए चिंता का विषय जरूर हैं। सर्वे में 65% लोगों ने मौजूदा कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कम से कम मध्यम स्तर की चिंता जताई। इनमें 40% लोगों को लगता है कि कीमतों में यह बढ़ोतरी लंबे समय तक जारी रह सकती है।
इसके बावजूद 44% खरीदार अपनी तय योजना के अनुसार घर खरीदना चाहते हैं। करीब 38% लोग खरीदारी को कुछ समय के लिए टाल सकते हैं, जबकि 18% लोग खरीदारी को अनिश्चित समय के लिए टालने या रद्द करने पर विचार कर रहे हैं।
खरीदारी टालने या रद्द करने वालों में 44% ने सामर्थ्य यानी बजट को सबसे बड़ी बाधा बताया। वहीं, 32% लोगों ने कहा कि उनके बजट में उपलब्ध घरों के विकल्प कम हो गए हैं।
68% लोग अपने इस्तेमाल के लिए खरीद रहे घर
सर्वे के मुताबिक, आवासीय मांग का मुख्य आधार अब भी स्वयं के इस्तेमाल के लिए घर खरीदना है। करीब 68% लोग घर अपने उपयोग के लिए खरीद रहे हैं, जबकि 32% का उद्देश्य निवेश है।
हालांकि, खरीदार घर को भविष्य की आर्थिक संपत्ति के रूप में भी देख रहे हैं। 77% से अधिक लोगों ने निवेश की संभावनाओं का आकलन करते समय किराये की आय को महत्वपूर्ण या बहुत महत्वपूर्ण माना। वहीं, 67% लोगों ने भविष्य में संपत्ति के पुनर्विक्रय मूल्य को अहम बताया।
नए प्रोजेक्ट की ओर भी बढ़ा रुझान
सर्वे में करीब 34% लोगों ने नए लॉन्च होने वाले प्रोजेक्ट को प्राथमिकता दी, जबकि 18% की पसंद तैयार घरों की रही। एच1 2022 में यह अनुपात 25% नए लॉन्च और 30% तैयार घरों का था।
नए प्रोजेक्ट चुनते समय डेवलपर की प्रतिष्ठा और पिछला रिकॉर्ड सबसे महत्वपूर्ण कारकों में रहा। 34% लोगों ने इसे प्राथमिकता दी, जबकि 21% ने शुरुआती कीमत में लाभ और कम शुरुआती वित्तीय बोझ को महत्वपूर्ण माना।
रियल एस्टेट अब भी पसंदीदा निवेश विकल्प
सर्वे में 60% लोगों ने निवेश के लिए रियल एस्टेट को प्राथमिकता दी। इसके बाद 20% ने शेयर बाजार, 11% ने सोना और 9% ने सावधि जमा को चुना।
वहीं, रियल एस्टेट के अलावा अन्य परिसंपत्तियों में निवेश करने वाले 44% लोगों ने कहा कि वे भविष्य में अपने निवेश से होने वाले लाभ का इस्तेमाल घर खरीदने के लिए कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि बढ़ती कीमतों ने खरीदारों की पसंद और खरीदारी के समय को प्रभावित किया है, लेकिन घर खरीदने की मूल इच्छा पर इसका असर सीमित रहा है। खरीदार अब अपने बजट, स्थान और घर के आकार में बदलाव कर रहे हैं, लेकिन बड़े और बेहतर घरों की मांग बनी हुई है।































