कोलकाता नगर निगम में बढ़ा राजनीतिक संकट
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। कोलकाता नगर निगम में एक और बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तहत मेयर और पूर्व मंत्री Firhad Hakim ने अपने पद से इस्तीफा देने की इच्छा जताई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उन्होंने तृणमूल सुप्रीमो Mamata Banerjee की अनुमति लेने के बाद यह फैसला किया है।
मंगलवार को नगर निगम के मेयर परिषद (ड्रेनेज) सदस्य तारक सिंह ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने पार्टी नेतृत्व और मेयर पर गंभीर सवाल उठाते हुए पद छोड़ा था। इसके एक दिन बाद फिरहाद हकीम के इस्तीफे की खबर सामने आने से तृणमूल के भीतर जारी असंतोष और भी स्पष्ट हो गया है।
तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में नगर निगम में प्रभावी ढंग से काम करना मुश्किल हो गया है। उनके अनुसार, फिरहाद हकीम ने ममता बनर्जी से सम्मानजनक तरीके से जिम्मेदारियों से मुक्त किए जाने की इच्छा जताई थी। शुरुआत में ममता ने उन्हें ऐसा करने से मना किया, लेकिन बाद में उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए सहमति दे दी।
फिरहाद हकीम नवंबर 2018 में कोलकाता के मेयर बने थे और नगर निगम के इतिहास में पहले मुस्लिम मेयर का गौरव हासिल किया था। वर्ष 2021 में वह दूसरी बार इस पद पर चुने गए। करीब आठ वर्षों तक मंत्री और मेयर की जिम्मेदारी एक साथ संभालने के बाद उनके इस्तीफे की खबर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के लिए बुधवार का दिन बेहद उथल-पुथल भरा रहा। पार्टी से निष्कासित विधायक Ritabrata Banerjee को 58 विधायकों के समर्थन से विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाए जाने की खबर सामने आई। वहीं पार्टी नेतृत्व ने राज्य की सभी संगठनात्मक समितियों को भंग करने का भी फैसला लिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालिया चुनावी पराजय, संगठन में बढ़ती नाराजगी और संभावित टूट को रोकने के लिए तृणमूल नेतृत्व लगातार रणनीतिक कदम उठा रहा है। ऐसे माहौल में फिरहाद हाकिम के इस्तीफे की अटकलों ने पार्टी के भीतर जारी संकट को और गहरा कर दिया है।



























