हथियारों के साथ 4 लाख रुपये नकद बरामद
कोलकाता : पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अंतरराज्यीय अवैध हथियार तस्करी गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। करीब 17 दिनों तक लगातार अलग-अलग राज्यों में अभियान चलाने के बाद STF ने गिरोह से जुड़े चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान कई आग्नेयास्त्रों के साथ करीब चार लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं। पुलिस को संदेह है कि बरामद नकदी अवैध हथियारों की बिक्री से हासिल की गई थी। हालांकि, इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है, इसकी जांच जारी है।
दुर्गापुर से गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई जांच
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले की जांच 25 सितंबर को पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर से मोहम्मद फरहान उर्फ मुसान की गिरफ्तारी के बाद तेज हुई। STF ने आरोपी के ठिकाने पर तलाशी के दौरान दो पिस्तौल, दो मैगजीन और 20 जिंदा कारतूस बरामद किए थे।
इस बरामदगी के बाद पुलिस ने हथियारों की तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच शुरू की। जांचकर्ताओं ने यह पता लगाने की कोशिश की कि अवैध हथियार किन रास्तों से पश्चिम बंगाल तक पहुंचाए जा रहे थे और इस कारोबार को संचालित करने वाले मुख्य आरोपी कौन हैं।
इसके बाद STF की टीम ने बिहार और झारखंड में अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी शुरू की। करीब 17 दिनों तक चले अभियान के दौरान जांचकर्ताओं को गिरोह के अन्य संदिग्ध सदस्यों के बारे में जानकारी मिली।
बिहार के मुंगेर से शाहनाज आलम गिरफ्तार
फरहान से पूछताछ के दौरान पुलिस को शाहनाज आलम उर्फ गुड्डू के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद STF की टीम बिहार के मुंगेर पहुंची और छापेमारी कर शाहनाज को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शाहनाज की भूमिका हथियारों की खरीद, बिक्री और आपूर्ति में क्या थी। जांच के दौरान अधिकारियों को इस नेटवर्क में कुछ अन्य लोगों के शामिल होने के संकेत भी मिले।
झारखंड और बिहार में भी STF की कार्रवाई
जांच को आगे बढ़ाते हुए STF ने 10 अक्टूबर को झारखंड के हजारीबाग और बिहार के जमुई में अभियान चलाया। इस दौरान हजारीबाग के गणेश राणा और जमुई के पवन कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया।
इन गिरफ्तारियों के साथ पुलिस ने गिरोह के नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश तेज कर दी है। अलग-अलग स्थानों पर तलाशी के दौरान कई आग्नेयास्त्र भी बरामद किए गए हैं। इसके अलावा लगभग चार लाख रुपये नकद जब्त किए गए।
पुलिस को आशंका है कि यह रकम अवैध हथियारों के कारोबार से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, नकदी के स्रोत और हथियारों की आपूर्ति से उसके संबंध की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
STF अब इस बात की जांच कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों के अलावा इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है। जांचकर्ताओं का मुख्य ध्यान हथियारों की आपूर्ति के स्रोत, तस्करी के रास्तों और गिरोह के कथित सरगनाओं की पहचान करने पर है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बरामद हथियार कहां से लाए गए थे और उन्हें किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। अधिकारियों को संदेह है कि इस मामले में कुछ अन्य राज्यों में सक्रिय लोगों की भूमिका भी हो सकती है।
17 दिनों तक चले इस अभियान में हुई गिरफ्तारियों और बरामदगी को अवैध हथियारों के नेटवर्क की जांच में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, पूरे गिरोह की संरचना और उसके कारोबार का वास्तविक दायरा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।






















