हाई कोर्ट ने कहा- जनता के टैक्स के पैसे से खिलवाड़ नहीं
कोलकाता : पश्चिम बंगाल की टाकी नगरपालिका में कथित बड़े वित्तीय घोटाले और धन की हेराफेरी के मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने मामले की जांच राज्य की अपराध जांच शाखा यानी CID को सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच उसकी निगरानी में आगे बढ़ेगी। मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति ओम नारायण राय की पीठ में इस मामले की सुनवाई हुई। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच CID से कराने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जनता के टैक्स के पैसे के साथ इस तरह से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिवक्ता तिलक मित्र को न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) भी नियुक्त किया है।
2023 में सामने आए थे भ्रष्टाचार के आरोप
टाकी नगरपालिका में कथित भ्रष्टाचार का मामला वर्ष 2023 में सामने आया था। उस समय तृणमूल कांग्रेस के ही पार्षद प्रद्युत दास ने तत्कालीन चेयरमैन सोमनाथ मुखोपाध्याय और नगरपालिका बोर्ड के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए थे।
प्रद्युत दास ने आरोप लगाया था कि नगरपालिका में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं और करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी की गई है। उन्होंने इस संबंध में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी शिकायत करने का दावा किया था। उनका आरोप था कि शिकायत के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा उन्होंने धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया था।
इसके बाद प्रद्युत दास ने टाकी नगरपालिका में कथित भ्रष्टाचार को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। याचिका में पिछले करीब आठ वर्षों के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं, धन के दुरुपयोग और कथित पक्षपात समेत कई आरोप लगाए गए।
फ्लोटिंग रेस्टोरेंट के नाम पर 80 लाख रुपये के गबन का आरोप
बुधवार की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता प्रद्युत दास की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सौम्य मजूमदार और अधिवक्ता ओमर फारूक गाजी ने अदालत के सामने कई आरोप रखे।
याचिकाकर्ता के वकीलों ने दावा किया कि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार इछामती नदी में फ्लोटिंग रेस्टोरेंट बनाने की परियोजना में करीब 80 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता हुई। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में तत्कालीन नगरपालिका चेयरमैन और बोर्ड की भूमिका रही।
इसके अलावा सरकारी जमीन को लीज पर देने के मामले में भी कथित तौर पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया गया। याचिकाकर्ता के वकीलों का दावा था कि कुछ महत्वपूर्ण फैसले नगरपालिका बोर्ड के प्रस्ताव या उचित प्रस्ताव पारित किए बिना ही लिए गए।
अदालत की निगरानी में होगी जांच
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने मामले की जांच CID को सौंप दी। अदालत ने कहा कि जांच कोर्ट की निगरानी में आगे बढ़ेगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने तिलक मित्र को न्याय मित्र नियुक्त किया है, जो जांच और कानूनी प्रक्रिया में अदालत की सहायता करेंगे।
अब CID को मामले में सामने आए वित्तीय लेनदेन, नगरपालिका के फैसलों, परियोजनाओं और कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों की जांच करनी होगी।
फिलहाल अदालत के इस आदेश के बाद टाकी नगरपालिका में कथित वित्तीय भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।






















