सुरक्षा घटाने पर राज्य से रिपोर्ट मांगी
कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा कम किए जाने के मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि अगर सुरक्षा में कमी के बीच अभिषेक बनर्जी पर दोबारा हमला होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। अदालत ने राज्य को सुरक्षा से जुड़े फैसले और अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
मामले की सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण और अधिवक्ता अयन भट्टाचार्य ने दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले अभिषेक को Z+ श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी। उनका दावा है कि चुनाव के बाद 10 मई को उनकी सुरक्षा घटाकर X श्रेणी कर दी गई।
वकीलों ने अदालत को बताया कि सुरक्षा में कमी के बाद अभिषेक पर कई बार हमले की घटनाएं हुई हैं। इसी आधार पर उनकी ओर से पर्याप्त सुरक्षा बहाल करने की मांग की गई है। अभिषेक ने सुरक्षा कवर बहाल करने की मांग को लेकर सितंबर में कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया था।
सोनारपुर की घटना का भी जिक्र
सुनवाई के दौरान सोनारपुर में अभिषेक के काफिले पर कथित हमले का भी उल्लेख किया गया। आरोप है कि तृणमूल कार्यकर्ता संजू कर्मकार के घर जाते समय अभिषेक को निशाना बनाकर ईंट-पत्थर, अंडे और जूते फेंके गए थे। उस दौरान उनके सिर पर हेलमेट लगाया गया था।
अभिषेक की ओर से पेश वकीलों ने इस घटना को उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का आधार बताया। वहीं, केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने अदालत में सुरक्षा को लेकर अलग पक्ष रखा।
केंद्र की ओर से कहा गया कि किसी व्यक्ति को सुरक्षा की जरूरत है या नहीं, इसका आकलन राज्य सरकार करती है और सुरक्षा मुहैया कराने की जिम्मेदारी भी राज्य की है। केंद्र के वकील ने सोनारपुर की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि अभिषेक को अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती करने की जरूरत नहीं बताई।
राज्य ने मांगा समय
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि सुरक्षा की समीक्षा के बाद 12 मई को इसे कम करने का फैसला लिया गया था। राज्य ने इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अदालत से तीन सप्ताह का समय मांगा।
हालांकि, न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य की ओर से सुरक्षा कम करने के फैसले से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज अदालत के सामने पेश नहीं किए गए हैं। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि सुरक्षा कब और किस आधार पर कम की गई तथा हमले के बाद अभिषेक की ओर से सुरक्षा को लेकर दिए गए आवेदन पर क्या कार्रवाई हुई।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राव ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि पत्थर फेंकना मामूली अपराध हो सकता है, लेकिन अगर वही पत्थर किसी व्यक्ति के शरीर पर लगकर चोट पहुंचाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है। अदालत ने इसी संदर्भ में सवाल किया कि रिपोर्ट दाखिल करने के लिए राज्य को समय दिया जा रहा है, लेकिन इस बीच अगर अभिषेक पर हमला होता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
अब राज्य को अगली सुनवाई से पहले सुरक्षा व्यवस्था और उसे कम करने के फैसले से जुड़े तथ्यों की विस्तृत जानकारी अदालत के सामने रखनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।






















