तत्काल सुनवाई से कोर्ट का इनकार
कोलकाता : दुर्गा पूजा से पहले पार्टी के कर्मचारियों के वेतन और अन्य जरूरी खर्चों के लिए बैंक खातों से पैसे जारी नहीं होने का आरोप लगाते हुए ममता तृणमूल ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी की ओर से अदालत से अपने फंड का इस्तेमाल करने की अनुमति देने की मांग की गई है। साथ ही मामले पर जल्द सुनवाई का अनुरोध भी किया गया था। हालांकि, अदालत ने तत्काल सुनवाई की मांग को स्वीकार नहीं किया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की अदालत में हुई। अदालत ने कहा कि पूजा की छुट्टियों के बाद कोर्ट खुलने पर इस मामले की सुनवाई की जाएगी।
कर्मचारियों की सैलरी और किराए का मुद्दा
ममता तृणमूल की ओर से आरोप लगाया गया है कि कोर्ट द्वारा नियुक्त स्पेशल ऑफिसर सुब्रत तालुकदार की समिति की ओर से फिलहाल पार्टी के लिए कोई राशि जारी नहीं की जा रही है। पार्टी का कहना है कि दुर्गा पूजा से पहले कर्मचारियों के वेतन और कार्यालय के किराए समेत कई जरूरी खर्चों का भुगतान करना है।
इसी को लेकर पार्टी ने अदालत से अपने बैंक खातों में मौजूद फंड से आवश्यक खर्च करने की अनुमति मांगी है।
नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी सवाल
मामले में स्पेशल ऑफिसर की ओर से यह भी पूछा गया है कि क्या चुनाव आयोग ने सिर्फ उपचुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज किया है या यह आदेश अनिश्चित अवधि के लिए है। ममता तृणमूल की ओर से अदालत में इस स्थिति को स्पष्ट करने की मांग की गई है।
दरअसल, चुनाव आयोग के अंतरिम निर्देश के तहत फिलहाल ममता और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों धड़ों को ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है।
तीन बैंक खाते किए गए थे फ्रीज
यह पूरा विवाद एक निजी बैंक में मौजूद तृणमूल के तीन खातों को फ्रीज किए जाने के बाद शुरू हुआ। पुलिस ने कथित अवैध लेनदेन के आरोपों की जांच के सिलसिले में इन खातों को फ्रीज किया था। इसके खिलाफ ममता तृणमूल ने हाई कोर्ट का रुख किया था।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने इन बैंक खातों के संचालन की निगरानी के लिए एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया था। अदालत ने 9 जुलाई को अपने आदेश में कहा था कि फिलहाल इन खातों पर ममता तृणमूल का अधिकार रहेगा, लेकिन पार्टी अपनी मर्जी से बिना किसी सीमा के रकम खर्च नहीं कर सकेगी।
अदालत के निर्देश के अनुसार, कोर्ट द्वारा नियुक्त अधिकारी पार्टी के रोजमर्रा के कामकाज और कर्मचारियों के वेतन जैसे आवश्यक खर्चों के लिए रकम जारी कर सकते हैं। यह व्यवस्था अगले वर्ष 29 जनवरी तक लागू रहने की बात कही गई थी।
राज्य सरकार ने भी उठाए थे सवाल
इस मामले में राज्य सरकार की ओर से भी बैंक खातों से जुड़े मुकदमे की स्वीकार्यता पर सवाल उठाया गया था। राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने दलील दी थी कि मामला ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ के नाम से दायर किया गया है, जबकि चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल इस नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
राज्य की ओर से यह तर्क दिया गया था कि जब चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अंतरिम आदेश दिया है, तब इसी नाम से दायर बैंक खाता संबंधी याचिका पर विचार नहीं किया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट ने पहले क्या कहा था?
सितंबर में मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने कहा था कि चुनाव आयोग ने अभी पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर कोई अंतिम फैसला नहीं किया है। आयोग का आदेश उपचुनाव के संदर्भ में अंतरिम प्रकृति का है।
इसी आधार पर हाई कोर्ट ने फिलहाल बैंक खातों के फंड को लेकर अपने पहले के आदेश में बदलाव नहीं किया था। अदालत ने कहा था कि 29 जनवरी तक ममता तृणमूल को आवश्यक खर्चों के लिए इन फंड का इस्तेमाल करने का अधिकार रहेगा, लेकिन खर्च कोर्ट द्वारा नियुक्त अधिकारी की निगरानी में होगा।
अब पूजा से पहले कर्मचारियों के वेतन और अन्य जरूरी खर्चों के लिए धन जारी करने को लेकर ममता तृणमूल की नई याचिका पर पूजा की छुट्टियों के बाद सुनवाई होगी।






















